वैसे तो नाम से ही स्पष्ट है कि स्वास्थ्य बीमा हमारे स्वास्थ्य संबंधी खर्चो को वहन करने के लिए कराया गया एक खास तरह का बीमा है। इसके बारे में बता दें कि स्वास्थ्य बीमा आपको वाहन बीमा की तरह हर साल करना होता है और अगर आपको स्वास्थ्य संबंधी कोई खर्च करना पड़े तो बीमा कंपनी आपके बदले वह खर्च करती है लेकिन अगर ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे और पूरे वर्ष आपको अपने स्वास्थ्य के लिए कोई खर्च न करना पड़े तो आपको अपने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी से कोई पैसा वापस नहीं मिलता है।
तो फिर मैं कराऊं ही क्यों?
हम सब ने देखा कि कोरोना के दौर में लोगों के साथ स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां खड़ी हो गईं। इतना ही नहीं, बल्कि कोरोना के बाद तो हृदयाघात यानि हार्ट अटैक की घटनाएं अचानक पहले के मुकाबले काफी बढ़ गई है। ज्यादातर लोगों की कमाई भी पहले जैसी शायद नहीं रही। ऐसे में हर व्यक्ति के पास बहुत सारा पैसा अचानक आई हुई स्वास्थ्य संबंधी आपदा के लिए खर्च करना आम बात होगी, यह उम्मीद रखना सही नहीं होगा।
यूं भी सोचिए कि अगर घर का मुखिया ही अगर अचानक बीमार पड़ जाए, तब परिवार अचानक इलाज के लिए पैसा कैसे जुटाएगा?
अच्छा ठीक है, पर अगर मैं बीमा करा लूं तो क्या होगा?
इसे कुछ-कुछ वाहन बीमा की से समझिए। वाहन बीमा कराते समय, बीमा कंपनी आपकी गाड़ी की (वर्तमान) कीमत का अंदाजा लगाकर उतने रुपए का बीमा करती है, जितने रुपए का बीमा कंपनी ने किया है, दुर्घटना/बुरे समय में कंपनी उतने ही रुपए आपकी गाड़ी पर खर्च करती है। लगभग उसी तरह स्वास्थ्य बीमा भी एक निश्चित रकम के लिए कराया जाता है यानी मान लीजिए अगर आपने 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा करवाया तो बीमा कंपनी आपके लिए 10 लाख रुपए तक खर्च करेगी, इससे ज्यादा नहीं!
लेकिन इसमें अच्छी बात यह है कि इसमें आपके आरोग्य और स्वास्थ्य की कीमत स्वास्थ्य बीमा कंपनी नहीं तय करती, बल्कि आप खुद अंदाजा लगाकर तय करते हैं कि आपको कितने रुपए का स्वास्थ्य बीमा कराना चाहिए। जाहिर है बीमा रकम ज्यादा होगी तो बीमे का प्रीमियम (बीमे की किश्त) भी ज्यादा चुकानी होगी।
स्वास्थ्य बीमा कराते समय कौन सी बात ध्यान देने की होती है?
स्वास्थ्य बीमा करवाते समय आपको यह ध्यान रखना होता है कि आप गांव में रहते हैं या शहर में आपकी दिनचर्या कैसी है? आपका स्वास्थ्य बिगड़ने की संभावना कितने प्रतिशत है? क्या आपको पहले से कोई गंभीर बीमारी जैसे हार्ट की समस्या जैसे कैंसर या कोई अन्य गंभीर बीमारी तो नहीं है। उसी के हिसाब से आपको सोच समझकर, स्वास्थ्य बीमा (मेडिक्लेम) पॉलिसी चुननी चाहिए।
1. आमतौर पर जो अस्पताल आपके शहर में अच्छे माने जाते हैं क्या वे अस्पताल आपकी बीमा कंपनी की लिस्ट में में कैशलेस इलाज के लिए चुने हुए हैं या नहीं। जी हां बिल्कुल ठीक समझे! अगर आपके पास स्वास्थ्य बीमा और आपकी तबीयत अचानक बिगड़ जाती है तो आप बड़े नामी गिरामी अस्पतालों में सीधे ही जाकर इलाज करवा सकते हैं जिसका खर्च बीमा कंपनी सीधे ही अस्पताल को कर देती है और आपको उसके लिए भुगतान नहीं करना होता है, शर्त यह है कि वह अस्पताल, आपकी बीमा कंपनी की लिस्ट में कैशलैस इलाज के लिए शामिल हो। अगर नहीं भी हो, तब भी आप इलाज करा सकते हैं, उसमें दिक्कत नहीं है, लेकिन अस्पताल पहले आपसे पैसा मांगेगा और बीमा कंपनी आपको वो पैसा लौटने के लिए आपसे सारे बिल वगैरह मांगेगी।
2. बीमा कंपनी आम तौर पर आपको स्वास्थ्य बीमे का सबसे बड़ा लाभ तब देती है, जब आप भर्ती होकर इलाज कराएं। हालांकि लगभग सभी स्वास्थ्य बीमा कंपनियां भर्ती होने के पहले के कुछ दिन और भर्ती होने के कुछ दिन बाद तक के इलाज का खर्च भी देती हैं।
3. आप यदि भर्ती हुए बिना भी स्वास्थ्य बीमा का लाभ उठा सकते हैं इसे डे केयर कहा जाता है, लेकिन इस तरह के बीमा लाभ की रकम आपकी पालिसी की कुल रकम (बीमित राशि) से बहुत कम होती है। मतलब ये कि अगर आपने 10 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कराया है तो, डे- केयर के लिए कंपनी पूरा 10 लाख खर्च नहीं कर देगी, बल्कि इसके लिए स्वास्थ्य बीमा की पॉलिसी में काफी कम रकम इसके लिए तय रहती है, और इस पैसे को लेने के लिए आपके पास प्रिस्क्रिप्शन (डॉक्टर की पर्ची) से सभी बिल तक सारे कागजात होने चाहिए।
4. आम तौर पर स्वास्थ्य बीमा कंपनियां कुछ खास बीमारियों को अपनी बीमा पॉलिसी में शामिल नहीं करती हैं, लिहाजा इनके बारे में आपको पॉलिसी लेते समय जांच करनी होती है।
5. आम तौर पर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी यानी मेडिक्लेम पॉलिसी में दंत चिकित्सा (दांतों का इलाज), गर्भधारण (मां बनने के दौरान की प्रक्रिया के दौरान होने वाले खर्च), नशे के कारण, लापरवाही के कारण, जानबूझकर खुद को पहुंचाई हुई चोट (आत्मघात) के कारण होने वाले ईलाज का खर्च बीमा कंपनियां वहन नहीं करती हैं।
6. अगर आपको स्वास्थ्य बीमा लेने के पहले से ही कोई बीमारी हो, लेकिन आप उसका जिक्र स्वास्थ्य बीमा (health insurance) karne वाली कंपनी से छुपाते हैं, तो बीमा कंपनी को अधिकार है कि वह आपके इलाज का खर्च देने से मना कर दे।
7. कुछ गंभीर बीमारियां, जैसे कैंसर आदि स्वास्थ्य बीमा लेते ही (फौरन उसी साल से) कवर नहीं होती हैं, आम तौर पर जब आप अपना स्वास्थ्य बीमा लगातार साल दर साल renew कराते हैं, तब कम से कम दो साल बाद से ऐसी गंभीर बीमारियां कवर की जाती हैं, लेकिन अचानक से होने वाली बीमारियां, बीमा कराने के लगभग एक महीने बाद से कवर होती हैं। इसके अलावा दुर्घटना के कारण होने वाला अस्पताल खर्च, पहले ही दिन से कवर होता है।
8. स्वास्थ्य बीमा आप अकेले के लिए, पति–पत्नी के वास्ते (एक साथ), परिवार के लिए (पति–पत्नी और उन पर आश्रित दो बच्चे) भी ले सकते हैं, बहुत कम कंपनियां “परिवार” शब्द में माता–पिता को भी शामिल करती हैं। इस बारे में पॉलिसी ब्रोशर/डॉक्यूमेंट को बेहद ध्यान से पढ़कर जांच लेना चाहिए।
